04-12-2025
हो गए है कई साल मगर पसंद मेरी सताती है कभी कभी खुश हूँ इस ज़िंदगी से मगर ज़िंदगी रंग दिखाती है कभी कभी रहता हूँ धूप के उजाले में मगर रात के अंधेरे में नींद आती नहीं कभी कभी भूल चुका हूँ उसे मैं मगर याद उसकी आती है कभी कभी